निरात्मा  

 रात के पहले पहर में

वो बड़ा हुआ

दूसरे में मरा

तीसरे में पिता बना

चौथा कभी ख़त्म नही हुआ ||

जब वो आता है  

तब अच्छे और बुरे  

दोनों मरते है

पर अच्छे कम

जो  शहीद कहलातें है ||

रात उसके साए लौटा दे

वरना सुबह नही होगी

बुरा किसी का ना

जो जितना अच्छा

उसका उतना ही भला ||

जितना  उसने  दिया

वो  बहुत  कम  था

उससे  जितना  उसके  पास  था

पर  वो बहुत  ज्यादा  था

उससे  जितना  उसने औरों  को  दिया ||

जब बुराई अच्छी लगने लगती है

वो ही दोषी ठहराया जाता है

क्यूंकि वो इकलौता गवाह है

तब शरीर शैतान का हो जाता है

और आत्मा वो रख लेता है  ||

-अंतिम अभय

 

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