मत्स्यकन्या

डूबने से बचाती
पर तैरना ना सिखा पाती
जो कभी नहीं डूबे
उन्हें वो बचकानी लगती ||
अगर तुम कभी डूबने लगे
तब तुम्हे बचाने वो आएगी
तुम्हें किनारे लगा
बिना कुछ कहे चली जायेगी ||
अगर तुम्हें कभी
समुन्दर में फिर जाना पढ़े
वो तुम्हें बचाने जरूर फिर से आयेगी ||
जिन्हें उसने बचाया उनमे
कोई उसे जलाशयों में ढूंढे
कोई ज़मीन में तलाशे
कोई भूल जाए कोई याद करे
मिले फिर उसे ही, जो तूफानों से टकराये ||
उसका एक घर नहीं
ना वो कभी ठहरी
उसकी निगाहें उसके लिए तरसती
जो पानी पर चल के दिखाए ||

Advertisements

4 thoughts on “मत्स्यकन्या

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s