विश्वविष

गलतफहमी से शुरू हुई जो वो कहानी न थी

धोखे से ख़त्म हुए जो वो रिश्ते न थे

तुम्हारी तरह प्यार आज़माया था मैंने भी

फर्क इतना रहा की किसी को बताया नहीं कभी

हमें बेवफा कहके चले जाने वाले

क्यों  फिर  बेवफा बन गए तुम भी

 

   अंतिम अभय

Advertisements

प्रीतप्रथा

पागलपन की सीमाओं पे चलती वो
हवाओं का ठिकाना ढूंढ़ती रहती ,
चाहा न था उसने कभी उसे छोड़ जाना
पर दर्द का क़र्ज़ तो था चुकाना ,
कह गयी बेवफा कह कर बदनाम कर देना
हमारी अधूरी कहानी याद मत करना ,
अगर खरा है प्यार का रिश्ता
तो जीतेजी फिर कभी मुझे आवाज़ न देना,
खुद को दुनिया का सबसे बड़ा जुआरी मानता
क्यूंकि मौत का खेल वो कभी हारा न था ,
कौनसा खेल खेल कर चली गयी वो उसके साथ
जब हारा तभी उसे उस खेल का पता चला ||

-अंतिम अभय

 

 

Ancient Zay

When Zay died, his whole life from birth to death started repeating again. Only difference was this time he found himself witnessing his whole life trapped inside his own mind and body over which he had no control. He felt no physical senses only emotions.

Eventually his death time arrived again and this time time didn’t stop but reversed. Comfortably numb trapped inside his mind and body, now he watched his same life go backwards. Then finally he succeeded in gaining control to some extent. Still he couldn’t change anything but he realized he himself was the ghost of his life.

As his body slowly disappeared in his mother’s womb, he thought what’d happen next. He felt a pin prick, sensed an intoxication and sleep came back to him after two lifetimes.

चरमवेद  

ध्वनि  की  दीवार  टूटेगी  और  शांति  के द्वार  जब  खुलेंगे,

जीवन  के  सारे  भेद  स्पष्ट  हो  जावेंगे

जलाशयों  में प्यासे  रह  ईंटो  की  किताब लिखोगे   ||

तब  फिर  अपनी  हर  बेकार  वस्तु  का  कारण  सामने  पाओगे ||

 

रावण  जब  अपनी  लिखी  रामायण  का  राम  बना,

तब  उसने  माना  महाभारत  के  गणेश

कोई  और  नहीं  हो  सकते  ||

जब  वो  रावण  था  उसका  सच  सिर्फ  वही  जानते  थे  ||

 

रामजी  ने  अगर  कभी  रावण  का  रूप  लिया,

कृष्ण ने  कभी  अगर  भीष्म  का  वेश  धरा

तो  बस  एक  रावण  की  लिखी  रामायण  में  ||

हनुमान  तो  सदा  से  ही  थे  और  हैं  राम  के  लिए ||

 

चिता को अग्नि आज बेटे नहीं बेटियां दे रही है

जो जानता है जो लिखा है

सोने की चिड़िया उसे ढूंढ रही है ||

वहीँ जहाँ बड़ा सफ़ेद कमल मीनारों से घिरा है ||

 

कानों  में  हवाएं  ढूंढ़ती  स्वराज

पागलपन  पुनर्जन्म  का  जवाब

मजदूर  के  अनंत  सफर  में  हर  रात   त्यौहार ||

वह ख्वाब  में  तारे  न  गिन पाया  न  पहचान  पाया  ||

 

जो लाशें जलीं हैं

वही जानती हैं

सड़ती लाशों के हाल ||

ब्रह्माण्ड लगता सीमित मायाजाल के बाद ||

 

जो  धर्म  के  अनुसार  तपस्या  से  मिलता

हाथ  एक  उसकी  आँखें  अनगिनत

आज  घर  घर  में  एक  कर्ण और  एक  विभीषण ||

पत्थर  में  विद्या  ढूंढता  एकलव्य  अंतिम  ||

अंतिम अभय

जन्मांतर

जैसे सूर्य कभी गीला नहीं हो सकता,
यन्त्र कभी मानव नहीं बन सकता,
और सत्य कभी मिथ्या नहीं लग सकता
वैसे ही हमारा प्यार कभी मर नहीं सकता ।।

सुख, दुःख, जुदाई, मिलन के मेले,
क्रोध भले ही हमको सब भुलवा देवे ,
हम घर पहुंचेंगे फिरसे ये कभी ना भूलना
तब पुराना याद कर साथ हँसते रोते रहना ।।

लुटेरे लूटा हुआ लौटाने को तरसेंगे ,
फरिश्ते सुख साँझल में महकेंगे ,
अँधेरे की चादर उतार नम धूप में
सुस्त सितारे हमें अनसुनी ग़ज़ल सुनावेंगे ।।

अंतिम अभय

रोगबुद्धि

अपने जवाब सारे मिल जाएंगे
बात किसी से न हो पावेगी ||

 

बस दिल के काले मत होना
बुराई तो किसी को भी घेर है सकती ||

 

कीचड़ में पत्थर भले न फेंकना
पर घर की गन्दगी से दूर भागना नहीं ||

 

भगवान् पे विश्वास मत तोड़ना
आस्था तो झूठी भी होती सही ||

Destination Infinity

Depone fallacy
Prophesies of pawns
Stirring the visions
Teleport exits
Luminas parcel bombs
Accidents threaten
White comatose reform
For the awaited era
Evolution doors jam

 

Orphanage of Sisters
Where silent sirens rang
Unregistered sins graved
Crusade rebellion crown
Lateral Inversions unshared
Innocent suicides everywhere
Freezing light crush souls
Annihilation of Gold unfolds

Reading an unapt letter
An unforgotten nun wept
Galleries of the chimes
Welcome new false legends
Promising unobvious
A thought never thought
Debt seal finally attested
No one left to be molested